Wednesday, February 4, 2026

पुलिस मेरे घर में जबरन घुसकर मेरी सास के साथ मारपीट की और मुझे बुरी तरह पीटकर मेरा पैर तोड़ दिया।


 मेरा नाम देवंती देवी, पतिस्वर्गीय सुरेंद्र सिंह, उम्र- लगभग 45 वर्ष, ग्राम किशनपुर, पोस्टगझंडी, थानातिलैया, जिलाकोडरमा की निवासी हूँ। मैं एक विधवा महिला हूँ और घर में अकेली रहती हूँ। मेरे साथ मेरी सास भी रहती हैं, जो स्वयं भी विधवा हैं। हम दोनों मेहनत-मजदूरी करके अपना जीवन यापन करती हैं। गाँव में जो भी काम मिल जाता है, वही कर के किसी तरह अपना पेट पालती हूँ।

मेरे जीवन की वह सबसे काली और भयावह रात थी| 11 जनवरी,2023 की रात में मैं और मेरी सास दोनों घर में सो रही थीं। हमारे घर में एक मिस्त्री भी रहता था, जो गाँव-घर में दरवाज़ा, पल्ला, खिड़की आदि बनाने का काम करता था। वह भी घर के दूसरे कमरे में सो रहा था।रात के लगभग 1 बजे होंगे, तभी अचानक हमारे घर के दरवाज़े पर ज़ोरदार झटका लगा। हम घबराकर आवाज़ देने लगीं—“कौन है? कौन है?

इसी बीच बाहर से गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए दरवाज़ा तोड़कर 10–12 की संख्या में पुलिसकर्मी जबरन मेरे घर में घुस आए।घर में घुसते ही वे लोग बिना कुछ बताए इधर-उधर मारपीट करने लगे। उन्होंने मुझ पर बेरहमी से लाठियाँ बरसाईं। मेरे पैर पर लगभग 10–20 लाठियाँ मारी गईं| जिससे मेरा पैर टूट गया। इसके अलावा मेरे पूरे शरीर पर लाठी से वार किया गया, जिससे पूरे बदन में तेज़ जलन और असहनीय दर्द होने लगा।जब यह सब देख मेरी सास मुझे बचाने आईं, तो पुलिस ने उन्हें भी गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए बेरहमी से पीटा। मैं ज़ोर-ज़ोर से रोने और चिल्लाने लगी। मेरी चीख-पुकार सुनकर घर में रहने वाला मिस्त्री भी जाग गया।

तभी पुलिस उसके पास पहुँची और उसे जबरन उठा लिया। उसे ले जाते हुए पुलिस कह रही थी| तुम लोग गाँव में शेर बने फिरते हो, मारपीट करते हो।
जबकि उस मिस्त्री ने कोई गलत काम नहीं किया था। इसके बावजूद पुलिस उसे मेरे घर से जबरन उठाकर अपने साथ ले गई।पुलिस ने मेरे घर में रखे थोड़े-बहुत सामान को भी इधर-उधर फेंक दिया। बिस्तर उलट-पलट दिए, सामान बिखेर दिया और यहाँ तक कि घर का छप्पर भी खोल-खोलकर देखा। पूरा घर अस्त-व्यस्त कर दिया गया।

मैं उस समय पैर टूटने के कारण ज़मीन पर पड़ी कराह रही थी। दर्द से तड़प रही थी और बार-बार पूछ रही थी| साहब, हमसे क्या गलती हो गई? आप हमें क्यों मार रहेहैं|लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। गाली-गलौज करते हुए पुलिस मिस्त्री को उठाकर ले गई।उस रात हम दोनों सास-बहू पूरी रात रोती रहीं। सुबह गाँव के एक डॉक्टर को बुलाया गया। इसके बाद मुझे इलाज के लिए गाँव से बाहर ले जाया गया, जहाँ मेरे पैर का उपचार हुआ। इलाज के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे, इसलिए कर्ज़ लेकर इलाज कराना पड़ा।

आज भी मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि हमारी क्या गलती थी, जिसके कारण पुलिस ने हमारे साथ इस तरह अमानवीय व्यवहार किया। बिना किसी कारण मेरे साथ मारपीट की गई, मेरा पैर तोड़ दिया गया और मेरा पूरा घर तहस-नहस कर दिया गया।
पैर टूटने के कारण मैं आज भी कोई काम करने की स्थिति में नहीं हूँ और मेरी आजीविका पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

अब मैं चाहती हूँ कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच हो और जिन पुलिसकर्मियों ने मेरे साथ मारपीट की तथा मेरा पैर तोड़ा, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। मुझे और मेरी सास को न्याय दिलाया जाए

पीड़िता का हस्ताक्षर

                                                                                                        देवंती देवी