मेरा नाम कृष्णा प्रताप उम्र- 74 वर्ष हैं| मुझे गांव में लोग छेदी प्रधान के नाम से जानते हैं| मैं दो बार 12 वर्ष तक ग्राम पंचायत बैरवन का लगातार ग्राम प्रधान रहा| मेरे तीन बेटे हैं तीनों की शादी हो गया है|हमारा पूरा परिवार एक साथ रहता हैं | मै ग्राम-बैरवन,थाना-जिला-वाराणसी का मूल निवासी हूँ|
16 मई 2023 को सुबह हमारे गाँव में जो घटना घटी| वह बहुत ही दर्दनाक थी| गाव का नौजवान संजय पटेल अपने ससुराल पिंडरा वाराणसी से अपने पत्नी व बच्चें के साथ घर वापस आ रहा था जिसका एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गया|जिसकी सूचना मिलते ही पूरे गांव मातम में सा छाया गया|
अभी इस घटना से हम लोग गमजदा थे | तभी उसी दिन सुबह लगभग 10:30 बजे विकास प्राधिकरण वाराणसी के उपाध्याय अभिषेक गोयल अपने टीम और पुलिस दल-बल के साथ जेसीबी लेकर हमारे गाँव की जमीन का सीमांकन करने पहुचे | जिसकी सुचना मुझे मिली मैं गाँव के लोगो के साथ जमीन सीमांकन स्थल पर पहुचा| और उपाध्याय अभिषेक गोयल जी व पुलिस अधिकारियों से हाथ जोड़ कर बैरवन में सुबह हुई घटना के बारे में बताकर बोला साहब अभी संजय पटेल का डेथ बाडी आने वाला हैं, गाँव के अधिकतर लोग घटना स्थल पर गयें है| जमीन का सीमांकन आज न कर दुसरे दिन करे |
लेकिन विकास प्राधिकरण वाराणसी उपाध्याय अभिषेक गोयल व पुलिस अधिकारीयों ने मेरी एक भी बात नहीं सुनी| और जेसीबी लेकर किसानों कि लगी टमाटर की फसल में कुदाकर पूरा टमाटर का फसल रौद कर खेत में से मिटटी का खुदाई करने लगे |उन्हें ऐसा करता देख मैं गाँव के किसानो के टमाटर की फसल बचाने के लियें जेसीबी के सामने खड़ा हो गया| जेसीबी बंद कर दो पूरा टमाटर का फसल ख़राब हो जायेगा|तभी 5-7 पुलिस वाले मुझे घेर कर लाठियां से मारने लगे| एक पुलिस ने मेरे आंख के ऊपर ऐसा लाठी मारा की मेरे आख का उपरी मलक फूट गया|लाठी पड़ते ही मै मै अपने चोटिल आँख के पास अपना हाथ लगाता कि दुसरे पुलिस वाले ने एक लाठी मेरे मुह पर मार दिया| मेरे दांत का जबड़ा हिल गया| उस वक्त मेरे आँखों से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था| मुझे गस्ती आने लगा| समझ में नही आ रहा था की कैसे अपने आप को सम्भालू|
पुलिस वाले हमे मारेंगें यही डर मेरे मन में सता रहा था | अभी यही सब बाते दिमाग में आ रही थी की इतने में कई पुलिस वाले हमें चारो तरफ से घेर कर, भद्दी-भद्दी गालियाँ देते हुये| लाठियां चला कर मारने लगें| मै लहू-लुहान हो कर जमीन पर गिर पड़ा| मैं बेहाल हो गया लेकिन पुलिस लगातार मुझे लाठियों से पीटती रही| उस वक्त ऐसा लग रहा था की जान नही बचेगी|
पुलिस उसी जख्मी हालत में वही छोड़ दिए| कुछ देर बाद होश आया तो किसी तरह धीरे-धीरे मै बैरवन के छोटे पूरा में गया| और एक खटिया पर लेट गया| उस वक्त मेरे शरीर में ताकत नही थी| मेरा पूरा शरीर खून से लथपथ था| मैं दर्द से कराह रहा था| किसी तरफ घूम नहीं पा रहा था| उस वक्त पुरे बस्ती में सन्नाटा था| कोई नजर नहीं आ रहा था| किसी से मदद मांग कर अपने घर तक जा सकू, इतने में मेरा लड़का मुझे ढूढते- ढूढते मेरे पास आया| मेरी हालत देखकर दवा कराने के लिए हमें ले जाने की कोशिश करने लगा| तभी पुलिस वाले आ गये| मेरे आँखों के सामने मेरे बेटे को भी वह लोग मारने लगे|यह सब देखकर बहुत तकलीफ हो रही थी मै| इतना बेबस की अपने बेटे को बचा नही पाया|
आज भी उस दिन को याद करता हूँ तो रोगटे खड़े हो जाते है| मेरे मन में बार-बार यही बात आती है| मैं जिस गांव में दो बार लगातार प्रधान था मेरा गांव में इतना सम्मान था लेकिन पुलिस वाले ने मुझे कही का नही छोड़ा|बिना मुआवजा दिए मेरी जमीन ले रहे हैं|और सभी के सामने मुझे लाठियां बरसा कर मार रहे थे| जैसे मैंने कोई बहुत बड़ा अपराध किया है|
मैं उसी हाल में बिना ईलाज करायें| दर्द में जाग कर रात विताया| दुसरे दिन सुबह हाई कोर्ट इलाहाबाद में विकास प्राधिकरण से हाई कोर्ट में इस मामले का मुकदमा चल रहा था|उसकी तारीख थी| तारीख पर 17 मई 2023 को हाई कोर्ट पहुंचा तो अपनी आप बीती जज साहब के सामने रखा| इसके बाद हाई कोर्ट ने तुरंत विकास प्राधिकरण के कार्य पर स्टे आर्डर मिला मैं ऑर्डर लेकर के घर वापस आया तब पुलिस वाले ने वहां पर काम बंद कर दिया था| इस घटना की वजह से पहले जैसा कुछ भी नही रहा| हर वक्त मन में एक भय सा बना हुआ है| कही भी आने जाने का मन नही करता है| पुलिस ने जो भी हमारे साथ किया वह बहुत ही अमानवीय है|पुलिस के मारने के बाद से हर वक्त शरीर में तकलीफ बनी हुई है|
मै यही चाहता हूँ कि इस घटना के जो जिम्मेदार है|उनके लोगो के खिलाफ कार्यवाही हो मुझे न्याय और सुरक्षा मिले|
पीड़ित
(कृष्ण प्रताप)