Sunday, August 16, 2020

अति महत्वपूर्ण : बिहार के 7 प्रवासियों की भूख-प्यास से ट्रेन में मौत,2 दिन के बदले 9 दिन में पहुंचा रही हैं श्रमिक स्पेशल


From: anup srivastava <minority.pvchr@gmail.com>
Date: Wed, May 27, 2020 at 11:59 AM
Subject: अति महत्वपूर्ण : बिहार के 7 प्रवासियों की भूख-प्यास से ट्रेन में मौत,2 दिन के बदले 9 दिन में पहुंचा रही हैं श्रमिक स्पेशल
To: <narendramodi1234@gmail.com>
Cc: pvchr.india <pvchr.india@gmail.com>, Dr. Lenin Raghuvanshi <lenin@pvchr.asia>, <connect@mygov.nic.in>


सेवा में,                             27 मई, 2020

माननीय प्रधानमंत्री महोदय,

भारत सरकार,

नई दिल्ली |

महोदय,

     आपका ध्यान ऑनलाइन न्यूज पोर्टल "www.janjwar.com" के इस खबर "बिहार के 7 प्रवासियों की भूख-प्यास से ट्रेन में मौत, 2 दिन के बदले 9 दिन में पहुंचा रही हैं श्रमिक स्पेशल" की और आकृष्ट करना चाहता हूँ | कोरोना से हुए लॉकडाउन में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला प्रवासी मजदूर है। जगह-जगह सड़क दुर्घटनाओं, पटरियों, रास्ते में पैदल चलते हुए लगभग 150 लोग दम तोड़ चुके हैं। इसके बाद अब ये प्रवासी मजदूर ट्रेनों में भी दम तोड़ने लगे हैं। इनमें ज्यादातर यूपी-बिहार के मजदूर हैं।

गौरतलब है कि प्रवासियों को उनके जिलों तक छोड़ने के लिए रेलवे की श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रेनें रास्ता भटककर कहीं की कहीं पहुंच रही हैं। 2 दिन में पहुंचने वाली ट्रेनें 9 दिन में पहुंच रही हैं तो लोग अब भूख-प्यास से ट्रेनों में ही दम तोड़ने लगे हैं। ट्रेनों में भूख-प्यास से मरने वालों में बच्चे, नौजवान भी और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। कई गर्भवती महिलाओं के बच्चे दुनिया देखने से पहले ही विदा हो गये हैं।

     अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए इन सभी घटनाओ कि निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही का आदेश देते हुए मृतकों के परिजनों को अविलम्ब मुआवजा दिलाने की कृपा करे |

 

न्यूज का लिंक -

 

https://janjwar.com/post/shramik-spacial-trains-arriving-in-9-days-instead-of-two-days-7-deaths-in-one-days-42915

 

भवदीय

डा0 लेनिन रघुवंशी

Lenin Raghuvanshi

Founder and CEO

People's Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR)

An initiative of Jan Mitra Nyas ISO 9001:2008

SA 4/2 A Daulatpur, Varanasi - 221002 India

Mobile no.+91-9935599333

Email:  lenin@pvchr.asia
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बिहार के 7 प्रवासियों की भूख-प्यास से ट्रेन में मौत, 2 दिन के बदले 9 दिन में पहुंचा रही हैं श्रमिक स्पेशल

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ट्रेन में हुई मासूम की मौत : पिता का आरोप भूख-प्यास से मर गया मेरा बच्चा (photo : dainik bhaskar)


2 दिन में पहुंचने वाली ट्रेनें 9 दिन में पहुंचा रही हैं और प्रवासी भूख-प्यास से ट्रेनों में ही तोड़ रहे हैं दम, ट्रेनों में भूख-प्यास से मरने वालों में बच्चे, नौजवान भी और बुजुर्ग सभी शामिल हैं, नवजात बच्चों की भी ट्रेन में हुई मौत…

पटना, जनज्वार। कोरोना से हुए लॉकडाउन में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला प्रवासी मजदूर है। जगह-जगह सड़क दुर्घटनाओं, पटरियों, रास्ते में पैदल चलते हुए लगभग 150 लोग दम तोड़ चुके हैं। इसके बाद अब ये प्रवासी मजदूर ट्रेनों में भी दम तोड़ने लगे हैं। इनमें ज्यादातर यूपी-बिहार के मजदूर हैं।

गौरतलब है कि प्रवासियों को उनके जिलों तक छोड़ने के लिए रेलवे की श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रेनें रास्ता भटककर कहीं की कहीं पहुंच रही हैं। 2 दिन में पहुंचने वाली ट्रेनें 9 दिन में पहुंच रही हैं तो लोग अब भूख-प्यास से ट्रेनों में ही दम तोड़ने लगे हैं। ट्रेनों में भूख-प्यास से मरने वालों में बच्चे, नौजवान भी और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। कई गर्भवती महिलाओं के बच्चे दुनिया देखने से पहले ही विदा हो गये हैं।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक इसमें एक घटना महाराष्ट्र से श्रमिक स्टेशन ट्रेन से लौट रहे मजदूर की है। आरा में जब लोगों ने उसे उठाना चाहा तो देखा उसकी मौत हो गयी है। मृतक की पहचान नबी हसन के पुत्र निसार खान उम्र लगभग 44 वर्ष के रूप में की गई। निसार खान गया का रहने वाला था। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की अव्यवस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात के सूरत से 16 मई को सीवान के लिए निकलीं दो ट्रेनें उड़ीसा के राउरकेला और बेंगलुरु पहुंच गईं।

वाराणसी रेल मंडल ने जब इस मामले में पता किया तो पता चला कि बिहार पहुंचने वाली ट्रेनें राउरकेला और बेंगलुरू पहुंच चुकी हैं। जिस ट्रेन को 18 मई को सिवान पहुंचना था, वह 9 दिन बाद सोमवार 25 मई को पहुंची। ट्रेन को गोरखपुर के रास्ते सीवान आना था, लेकिन छपरा होकर सोमवार के तड़के 2.22 बजे वह सीवान पहुंची। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का कहीं से कहीं पहुंचने का सिलसिला मीडिया में मामला उछलने के बाद भी थमा नहीं है। जयपुर-पटना-भागलपुर 04875 श्रमिक स्पेशल ट्रेन रविवार की रात पटना की बजाय गया जंक्शन पहुंच गई।

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पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया थाना के तुलाराम घाट निवासी मो. पिंटू शनिवार 23 मई को दिल्ली से पटना के लिए ट्रेन में बैठे थे। सोमवार 25 मई की सुबह दानापुर से मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंचे। मुजफ्फरपुर में बेतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान उनके मासूम बेटे इरशाद की मौत हो गई। पिंटू कहते हैं, उमस भरी गर्मी और भूख के कारण इरशाद की मौत हुई है। अगर खाना नसीन हो गया होता तो हम अपने बच्चे को नहीं खोते, वो हमारे साथ होता।

वहीं महाराष्ट्र के बांद्रा टर्मिनल से 21 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से घर लौट रहे कटिहार के 55 वर्षीय मोहम्मद अनवर की सोमवार 25 मई की शाम बरौनी जंक्शन पर मौत हो गई। मीडिया में आई जानकारी के मुताबिक अनवर ने बरौनी में 10 रुपये का सत्तू खरीद कर खाया और कर्मनाशा से कटिहार जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन पर सवार होने से पहले वह पानी लेने उतरा था, इसी बीच उसकी मौत हो गई।

मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि कटिहार के रहने वाले मोहम्मद वजीर अहमदाबाद में मजदूरी करते थे। वे श्रमिक स्पेशल ट्रेन से अपनी पत्नी बच्चों और साली अरवीना खातून के साथ घर आ रहे थे। रास्ते में अरवीना खातून की तबीयत ट्रेन में ही खराब हो गई और लगभग 12 बजे दिन में ट्रेन में ही उनकी मौत हो गई। श्रमिक ट्रेन जब दोपहर बाद 3:30 बजे मुजफ्फरपुर पहुंची तो उनके शव को उतारा गया।

मोहम्मद वजीर ने बताया कि उनकी साली की तबीयत पिछले 3 दिनों से खराब चल रही थी। प्रशासन द्वारा एंबुलेंस के माध्यम से उन्हें कटिहार भेज दिया गया है। इसी तरह पश्चिम चंपारण के रहने वाले मोहम्मद पिंटू अहमदाबाद से श्रमिक ट्रेन से दानापुर पहुंचे और दानापुर से 25 मई को सीतामढ़ी वाली विशेष ट्रेन से सीतामढ़ी जा रहे थे। यात्रा के क्रम में उनके बच्चे की तबीयत खराब हो गई और मुजफ्फरपुर में उनके बच्चे मोहम्मद इरशाद अहमद की मौत हो गई।

मौतों का सिलसिला मासूम इरशाद और मोहम्मद अनवर पर आकर ही नहीं थमा है। सूरत से श्रमिक स्पेशल से सोमवार 25 मई की दोपहर 1 बजे सासाराम पहुंची महिला ने अपने पति से कहा कि उसे भूख लगी है। स्टेशन पर ही पति के सामने उसने नाश्ता किया और उसके बाद वह कंपकंपाने लगी। उसके बाद पति की गोद में ही उसने दम तोड़ दिया। मृतक महिला ओबरा प्रखंड के गौरी गांव की रहने वाली थी। महिला की मौत होते ही सासाराम स्टेशन पर हड़बड़ी मच गयी, लोग इधर-उधर भागने लगे। पत्नी की लाश लिये पति असहाय हालत में था।

इसके अलावा महाराष्ट्र से आ रहे एक श्रमिक की ट्रेन में हालत खराब होने के बाद मौत हो गई। मरने वाला शख्स मोतिहारी जिले के कुंडवा-चैनपुर का बताया जा रहा है। महाराष्ट्र से बिहार लौट रहे इस शख्स की तबीयत खराब होने के बाद उसे ट्रेन से उतारकर जहानाबाद सदर अस्पताल ले जाया गया, मगर तब तक उसकी सांसें उखड़ चुकी थीं।

राजकोट-भागलपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से गया में सोमवार 25 मई को 8 माह का एक बच्चा भी मरने वालों में शामिल है। परिजनों ने बच्चे के बजाय उसकी लाश बाहर निकाली। यह परिवार मुम्बई से सीतामढ़ी लौट रहा था। जानकारी के मुताबिक तबीयत खराब होने के बाद आगरा में बच्चे का इलाज हुआ, मगर उसके बाद कानपुर के पास मौत हो गई। कानपुर से गया तक मां-बाप ने अपने कलेजे के टुकड़े की लाश के साथ सफर किया। बच्चे के पिता देवेश पंडित सीतामढ़ी के खजूरी सैदपुर थाना क्षेत्र के सोनपुर गांव का रहने वाले हैं।

अहमदाबाद से मुजफ्फरपुर पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन में कटिहार की रहने वाली 23 साल की अलविना खातून भी नहीं उतर पायीं, बाहर निकली तो उनकी लाश। अलविना अपने जीजा इस्लाम खान के साथ अहमदाबाद से घर लौट रही थीं। विक्षिप्त अलविना के जीजा इस्लाम खान रो-रोकर बताते हैं अलविना का इलाज अहमदाबाद में चल रहा था, मगर लॉकडाउन के बाद जब हम लोगों के लिए हालात बहुत बदतर हो गये तो हमने लौटने का फैसला किया, मगर मुझे नहीं पता था कि मैं अपने साथ अलविना नहीं उसकी लाश के साथ लौटूंगा।

Anup Srivastava
Senior Member of Management Committee and Programme Manager
People's Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR)
An initiative of Jan Mitra Nyas ISO 9001:2008
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अति महत्वपूर्ण : मुंबई से बनारस पहुंची श्रमिक ट्रेन से निकली दो लाशें, मृतक जौनपुर और आज़मगढ़ केनिवासी


From: anup srivastava <minority.pvchr@gmail.com>
Date: Wed, May 27, 2020 at 3:08 PM
Subject: अति महत्वपूर्ण : मुंबई से बनारस पहुंची श्रमिक ट्रेन से निकली दो लाशें, मृतक जौनपुर और आज़मगढ़ केनिवासी
To: <cr.nhrc@nic.in>
Cc: <sgnhrc@nic.in>, <dg-nhrc@nic.in>, <registrar-nhrc@nic.in>, <jst.nhrc@nic.in>, <js-nhrc@nic.in>, <nhrcestt@nic.in>, covdnhrc <covdnhrc@nic.in>, pvchr.india <pvchr.india@gmail.com>, Dr. Lenin Raghuvanshi <lenin@pvchr.asia>, ionhrc <ionhrc@nic.in>, jrlawnhrc <jrlawnhrc@hub.nic.in>, Section Officer SB-2 NHRC <so7.nhrc@nic.in>, <ar6.nhrc@nic.in>


सेवा में,                           27 मई, 2020

माननीय अध्यक्ष महोदय,

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,

नई दिल्ली |

महोदय,

     आपका ध्यान ऑनलाइन न्यूज पोर्टल "www. junputh.com" के इस खबर "मुंबई से बनारस पहुंची श्रमिक ट्रेन से निकली दो लाशें, मृतक जौनपुर और आज़मगढ़ के निवासी" की और आकृष्ट करना चाहता हूँ | प्रवासी मजदूरों को घर वापस लाने के लिए सरकार द्वारा चलायी गयी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें लाश उगल रही हैं। बुधवार सुबह मुम्बई से बनारस के मंडुआडीह स्टेशन पर पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन से दो लाशें निकली हैं। मृतक जौनपुर और आज़मगढ़ के हैं। एक 20 वर्षीय विकलांग है और दूसरा 63 वर्षीय बुजुर्ग।

ट्रेन से लाश बरामद होते ही हड़कम्प मच गया। चूंकि बनारस आ रही ट्रेनों को मंडुआडीह में ही रोका जा रहा है, लिहाजा वहां कोविड-19 संक्रमण की जांच और पीपीई किट सहित कर्मचारियों की व्यवस्था भी है। इन लाशाें को ट्रेन से पीपीई किट पहने कर्मचारियों ने निकाला, उसके बाद इन्हें सैनिटाइज़ किया गया।

दोनों लाशो के सैनिटाइज़ेशन का काम पूरा हो चुका है। जीआरपी थाने के एसएचओ ने फोन पर बताया कि एक व्यक्ति 20 साल का विकलांग है। इसकी पहचान जौनपुर के बदलापुर स्थित गांव लालापुरा निवासी दशरथ प्रजापति के रूप में की गयी है। यह व्यक्ति सूरत में काम करता था।

      अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इस मामले को संज्ञान में लेते हुए इस पर न्यायोचित कार्यवाही करते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने की कृपा करे |

न्यूज का लिंक –

https://junputh.com/open-space/two-dead-bodies-recovered-from-shramik-train-mumbai-to-varanasi/

 

भवदीय

डा0 लेनिन रघुवंशी

Lenin Raghuvanshi

Founder and CEO

People's Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR)

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Email:  lenin@pvchr.asia
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मुंबई से बनारस पहुंची श्रमिक ट्रेन से निकली दो लाशें, मृतक जौनपुर और आज़मगढ़ के निवासी

May 27, 2020 - by शिव दास - Leave a Comment


 

प्रवासी मजदूरों को घर वापस लाने के लिए सरकार द्वारा चलायी गयी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें लाश उगल रही हैं। बुधवार सुबह मुम्बई से बनारस के मंडुआडीह स्टेशन पर पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन से दो लाशें निकली हैं। मृतक जौनपुर और आज़मगढ़ के हैं। एक 20 वर्षीय विकलांग है और दूसरा 63 वर्षीय बुजुर्ग।

ट्रेन से लाश बरामद होते ही हड़कम्प मच गया। चूंकि बनारस आ रही ट्रेनों को मंडुआडीह में ही रोका जा रहा है, लिहाजा वहां कोविड-19 संक्रमण की जांच और पीपीई किट सहित कर्मचारियों की व्यवस्था भी है। इन लाशाें को ट्रेन से पीपीई किट पहने कर्मचारियों ने निकाला, उसके बाद इन्हें सैनिटाइज़ किया गया।

दोनों लाशाें के सैनिटाइज़ेशन का काम पूरा हो चुका है। जीआरपी थाने के एसएचओ ने फोन पर बताया कि एक व्यक्ति 20 साल का विकलांग है। इसकी पहचान जौनपुर के बदलापुर स्थित गांव लालापुरा निवासी दशरथ प्रजापति के रूप में की गयी है। यह व्यक्ति सूरत में काम करता था।


 

जनपथ को जो दो तस्वीरें मिली हैं, एसएचओ के मुताबिक वे एक ही व्यक्ति की हैं जो विकलांग है और जौनपुर का है।

एसएचओ के मुताबिक दूसरी लाश आज़मगढ़ के रामरतन रघुनाथ की है। इसका निवास पता हैः 'ए' विंग, रूम नंबर 43, आकाशदीप हाउसिंग सोसायटी, आयकर ब्लॉेक, अस्मिता भवन, लिंकरोड, जोगेश्वरी पूर्व, मुंबई। इसकी उम्र 63 बतायी गयी है।

पुलिस के मुताबिक किसी एक नंबर से यह व्यक्ति लगातार बात कर रहा था जिसमें इसने अपना मूलनिवास आज़मगढ़ बताया है लेकिन गांव आदि का पता अभी नहीं चल सका है।

बाकी विवरण आते ही ख़बर अपडेट की जाएगी।

इससे पहले भी श्रमिक ट्रेनों में मजदूरों की मौत की खबर आ चुकी है।

 

 

Anup Srivastava
Senior Member of Management Committee and Programme Manager
People's Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR)
An initiative of Jan Mitra Nyas ISO 9001:2008
SA 4/2 A Daulatpur, Varanasi - 221002 India
Mobile no.+91-9935599335
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12 Migrants in Uttrakhand during lockdown


From: <nhrc.india@nic.in>
Date: Fri, Jun 26, 2020 at 12:06 PM
Subject: Case No.492/35/5/2020
To: <uttarakhandhrc@gmail.com>



Case No.- 492/35/5/2020
NATIONAL HUMAN RIGHTS COMMISSION
(LAW DIVISION)
* * *
MANAV ADHIKAR BHAWAN, BLOCK-C,
G.P.O. COMPLEX, INA, NEW DELHI- 110023
Fax No.: 011-24651332    Website: www.nhrc.nic.in
 
Date : 26/06/2020  
To,
 
The Secretary
UTTARAKHAND State Human Rights Commissions
6, Bharmawala, Sahastradhara Road,Dehradun, Uttarakhand-248001
 
Sir/Madam,
 
The complaint dated 27/03/2020 received from ANUP SRIVASTAVA of PVCHR in respect of 12 MIGRANT WORKERS, was placed before the Commission on 26/06/2020. Upon perusing the complaint, the Commission directed as follows:
 
       The grievance raised in the complaint, listed above, relates to a matter, which is subject to the State.  Let the complaint be transferred to the concerned State Human Rights Commission u/s 13(6) of the Protection of Human Rights Act, 1993, for disposal in accordance with the provisions of the Act.
 
       2. Accordingly, I am attaching a scanned copy of the complaint, for its disposal at your end.
 

Your's faithfully

Sd/-

ASSISTANT REGISTRAR (LAW)

SB-3 Section

Ph. No.

CC To:
Case No. 492/35/5/2020
ANUP SRIVASTAVA,PVCHR
ANUP.PVCHR@GMAIL.COM
,


236 FAMILIES OF SARAIKELA of Jharkhand


From: <nhrc.india@nic.in>
Date: Mon, Jun 29, 2020 at 1:25 PM
Subject: Case No.570/34/20/2020



Case No.- 570/34/20/2020
NATIONAL HUMAN RIGHTS COMMISSION
(LAW DIVISION)
* * *
MANAV ADHIKAR BHAWAN, BLOCK-C,
G.P.O. COMPLEX, INA, NEW DELHI- 110023
Fax No.: 011-24651332    Website: www.nhrc.nic.in
 

Date : 29/06/2020  
To,
 
THE CHIEF SECRETARY

SERAIKELA-KHARSAWAN JHARKHAND

 
 
Sir/Madam,
 
         The complaint dated 28/03/2020, received from ANUP SRIVASTAVA of PVCHR in respect of 236 FAMILIES OF SARAIKELA, was placed before the Commission on 29/06/2020. Upon perusing the complaint, the Commission directed as follows:
 
 
          This complaint be transmitted to the concerned authority for such action as deemed appropriate. The authority concerned is directed to take appropriate action within 8 weeks associating the complainant/victim and to inform them of the action taken in the matter.
 
 
2.         Accordingly, I am attaching scanned copy of the complaint for necessary action as per the directions of the Commission.
 
 

Yours faithfully

Sd/-

Mithu Deb

SECTION OFFICER

SB-5 Section

Ph. No. 011-24663474

CC to


Complainant Details:
Case No. 570/34/20/2020
ANUP SRIVASTAVA
ANUP.PVCHR@GMAIL.COM
,


Sd/-

Mithu Deb

SECTION OFFICER

Ph. No. 011-24663474


Tuesday, August 4, 2020

दबंगों ने श्मशान में अंतिम संस्कार करने से दलित परिवार को रोका, चिता से हटानी पड़ी महिला की लाश


From: PVCHR Communication <cfr.pvchr@gmail.com>
Date: Fri, Jul 31, 2020 at 10:15 AM
Subject: दबंगों ने श्मशान में अंतिम संस्कार करने से दलित परिवार को रोका, चिता से हटानी पड़ी महिला की लाश
To: cr.nhrc <cr.nhrc@nic.in>, <chairnhrc@nic.in>, NHRC <ionhrc@nic.in>, covdnhrc <covdnhrc@nic.in>
Cc: lenin <lenin@pvchr.asia>


To, 
The Chairperson 
National Human Rights Commission 
New Delhi

Respected Sir, 

I want to bring in your kind attention towards the news published in News 18 Hindi on 22 July, 2020 regarding दबंगों ने श्मशान में अंतिम संस्कार करने से दलित परिवार को रोका, चिता से हटानी पड़ी महिला की लाश https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/agra-agra-dabangs-prevent-dalit-family-from-cremation-at-crematorium-dead-body-had-to-be-removed-from-funeral-pyre-nodbk-3183249.html

Therefore it is a kind request please take appropriate action at earliest. 

Thanking You


Sincerely Yours


Lenin Raghuvanshi

Convenor 

Peoples' Vigilance Committee on Human Rights 



दबंगों ने श्मशान में अंतिम संस्कार करने से दलित परिवार को रोका, चिता से हटानी पड़ी महिला की लाश
Agra News in Hindi

दबंगों ने श्मशान में अंतिम संस्कार करने से दलित परिवार को रोका, चिता से हटानी पड़ी महिला की लाश
विवाद के बाद अछनेरा पुलिस मौके पर पहुंच गई. उसने हंगामा को रोकवा तो दिया लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

मामला आगरा के अछनेरा क्षेत्र (Achhnera Region) के रायभा का है. अब इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. पुलिस पर दबंगों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लग रहा है.

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आगरा. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में जातिवाद (Casteism) का इंसानियत पर भारी पड़ने का एक और मामला सामने आया है. आगरा में नट समाज की महिला की मौत के बाद परिवार वालों ने गांव के एक शमशान में उनकी चिता बनाई थी. मुखाग्नि देने की तैयारी चल रही थी, तब तक सवर्ण समाज के कुछ लोग वहां पहुंच गए. आरोप है कि उन लोगों ने अंतिम संस्कार (Funeral) जबरन रुकवा दिया. हंगामे के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची. इसके बाद भी वहां चिता नहीं जली. पुलिस की मौजूदगी में बेबस नट समाज ने महिला का शव चिता से उतारा और दूसरी जगह अंतिम संस्कार किया.

जानकारी के मुताबिक, मामला आगरा के अछनेरा क्षेत्र के रायभा का है. अब इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. बताया जा रहा है कि अछनेरा क्षेत्र में 25 साल की पूजा पत्नी राहुल की मौत हो गयी थी. महिला का शव लेकर परिजन श्मशान पहुंचे. कुछ ही देर में ठाकुर समाज के लोग आकर विरोध करने लगे. आख़िरकार नट समाज को चिता से महिला का शव निकलवाकर वापस भिजवा दिया गया. शव को चिता से निकाल कर नट समाज के लोगों ने दूसरी जगह अंतिम संस्कार किया.

आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
विवाद के बाद अछनेरा पुलिस मौके पर पहुंच गई. उसने हंगामा को रुकवा तो दिया, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसे में मजबूरन तहसील किरावली गांव रायभा में नट समाज की महिला के शव का चिता से निकालकर दूसरी जगह पर अंतिम संस्करा करना पड़ा. खास बात यह है कि देहांत होने के बाद उच्च समाज की श्‍मशान भूमि पर शव जलाने को लेकर विवाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया. साथ ही पीड़ित परिवार की मदद भी नहीं की.
खंडवा में भी रोका था रास्ता


बता दें कि साल 2016 में कुछ इसी तरह की खबर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सामने आई थी, जहां एक दलित महिला की मौत के बाद गांव के दबंगों ने उनकी शवयात्रा रोक दी थी. करीब दो घंटे तक चले विवाद के बाद पुलिस की मौजूदगी में महिला का अंतिम संस्कार किया गया था. धनगांव थाना क्षेत्र के डोंगरगांव में एक दलित महिला मैदाबाई (70) का लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी. परिजन कावेरी नदी पर बने गौ घाट पर महिला का अंतिम संस्कार करने करना चाहते थे. गौ घाट पर जाने का रास्ता गांव के दबंग परिवार सुंदरलाल गुर्जर के खेत से होकर जाता है. आरोप है कि सुंदरलाल के बेटे और परिवार की दो महिला सदस्यों ने शवयात्रा का रास्ता रोक दिया और मैदाबाई के परिजनों को अपने खेत से गुजरने नहीं दिया था.
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People's Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR)

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हाँटस्पांट नवापुरा नंगे बदन सीवर सफाई,सुरक्षामानको की रुसवाई के सन्दर्भ में-


From: PVCHR Communication <cfr.pvchr@gmail.com>
Date: Fri, Jul 31, 2020 at 1:14 PM
Subject: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हाँटस्पांट नवापुरा नंगे बदन सीवर सफाई,सुरक्षामानको की रुसवाई के सन्दर्भ में-
To: cr.nhrc <cr.nhrc@nic.in>, <chairnhrc@nic.in>, NHRC <ionhrc@nic.in>, covdnhrc <covdnhrc@nic.in>
Cc: lenin <lenin@pvchr.asia>


सेवा में,                                               

श्रीमान् अध्यक्ष महोदय,

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

नई दिल्ली|


विषय – उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हाँटस्पांट नवापुरा नंगे बदन सीवर सफाई,सुरक्षा मानको की रुसवाई के सन्दर्भ में-


महोदय,

      विदित हो कि मै आपका ध्यान दिनांक 26 जुलाई,2020 को दैनिक जागरण की ओर आपका ध्यान आकुष्ठ कराना चाहता हूँ| सफाई कर्मियों को बिना सुरक्षा उपकरण नंगे बदन सीवर सफाई करायी जा रही है| शनिवार को ऐसा दारानगर के नवापुरा में देखने को मिला| जहाँ शरीर पर सिर्फ गमछा पहनकर सफाई कर्मी मैनहोल में उतर गाद निकाल रहा था|

      समाचार पत्र में यह भी देखा गया कि हाँथ में ग्लब्स था और न ही रेनकोट पैर में जुते नही थे| कमर में बेल्ट या रस्सी भी नही था| आक्सीजन सिलेंडर भी नही था| बाल्टी से सीवर लाईन में जमी गाद निकाल रहे थे| यह कार्य वहा हो रहा था जिसे कोरोना संक्रमित के कारण हाँटस्पांट बनाया गया है| ठीकेदार की निगरानी में हो रहे काम के बारे पूछने पर बताया कि क्या करे| सुरक्षा उपकरण दिये नही जाते|

अत: श्रीमान् महोदय से निवेदन है गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुये ठीकेदार की निगरानी में हो रहे कार्य को सुरक्षा मानको से कार्य कराने के लिए आदेशित व अति गंभीर लापरवाही करने के लिए कार्यवाही किया जाये|

संलग्नक – पेपर कटिंग

                                                   भवदीय

 

                                                 लेनिन रघुवंशी

                                                   संयोजक 



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