Wednesday, February 4, 2026

हम गरीब आदमी हैं साहब, बस पेट पालते हैं| यही जुर्म हो गया हमारा

 

मेरा नाम  सोनू उर्फ रफावत उम्र- 33 वर्ष है| मै पेशा से मजदूर हूँ| मै  ग्राम-खोरड़ीह, पोस्ट-सेमरा बरहो, थाना -राजगण,तहसील-मड़ीहान, जिला-मिर्जापुर का निवासी हूँ| मेरे परिवार में  एक बेटी, दो बेटे है|

घटना 21 जनवरी,2024 की सुबह आम दिनों जैसी थी। मैं अपने घर से निकला था| कतवरिया मुर्गा फार्म की ओर कुछ पैसे कमाने की उम्मीद लिए। लेकिन क्या पता था कि ये दिन मेरी जिंदगी का सबसे डरावना दिन बन जाएगा। गाँव में दो लोग फिरोज और गोपाल के बीच किसी लेन-देन को लेकर बहस हो रही थी। बहस होतेहोते बात बढ़ गयी| गाली-गलौज  झगड़ा शुरू हो गया| इतने में किसी ने मौके पर फोन करके पुलिस को सूचित कर दिया| पुलिस आई और बात और बिगड़ गई। फिरोज की पत्नी और बेटियाँ भी झगड़े में शामिल हो गईं। मामला बढ़ता गया| इतने में 10-12 पुलिस की गाड़ियाँ गाँव में भर आईं|  जैसे कोई बड़ा अपराधी पकड़ा जाना हो।

मैं तो बस अपने काम से जा रहा था| लेकिन रमपुरिया पुल पर अचानक 8 पुलिसवालों ने मुझे पकड़ लिया। मुझे नहीं पता था क्यों मेरा मोबाइल बाइक की चाबी और पर्स जिसमें 3500 थे| सब छीन लिए गए। गाड़ी में घसीटते हुए थाने ले जाया गया|  बोले कि बस पूछताछ करनी है।

असल में वो एक डरावना खेल था। थाने में मुझे पीटा गया| गालियाँ दी गईं। मेरी बहन के नाम पर ऐसी गालियाँ| जिन्हें याद करके आज भी मेरी आत्मा कांप जाती है। बार-बार मुझसे पूछा गया| फिरोज कहाँ है| मैं क्या बताता साहब? मुझे खुद नहीं पता था। मेरे फोन करने पर भी फिरोज का नंबर बंद था। गोपाल सिंह ने भी कहा कि "तुम्हारा नाम मैंने नहीं दिया", लेकिन पुलिस माने तब न।

रात भर खाना मिला पानी। नींद कहाँ से आती|  जब पुलिसवाले बार-बार धमकी दें रहे थे की कबूल कर लो नहीं तो करेंट देंकर  मार डालेंगे। मेरा दिल टूट रहा था| मेरी बीवी  मेरे बच्चे बिना खाए-पिए कैसे होंगे| मुझे मर जाने का डर नहीं था| डर था पीछे छूटे उन मासूम चेहरों का आगे क्या होगा| यही सब रात भर रोता सोचता रहा|

सुबह होते ही जब फिर से पुलिस वाले मार पीट शुरू कर दिए तो मुझसे बर्दास्त नही हो पाया|लाचार होकर मैंने कहा साहब जो कहोगे मान लूँगा| बस जान बख्श दो| फिर एक पुलिसवाले ने मुझे एक देवान के सामने एक कट्टा पकड़ा दिया और फोटो खींचकर इस धारा में 147, 148, 307, 353, 323, 338, 504, 506 fir करा दिया गया|

मुझे मेडिकल के नाम पर अस्पताल ले जाया गया| लेकिन डॉक्टर ने बिना देखे ही मेडिकल कर दिया। मेरे सिर से खून बह रहा था| लेकिन किसी पुलिस वालो ने डाक्टर से दवा के लिए नही बोला|

22 जनवरी,2025 को मुझे और फिरोज की पत्नी नाबालिग बेटियों को जिला जेल भेज दिया गया। जेल में मुझे शौचालय की नाली तक साफ कराई गई। पैसा नहीं था तो मार भी खाया  और काम भी करवाया गया। उस समय मै जेल में बोला "हम गरीब हैं साहब, क्या गरीब इंसान नहीं हैं| लेकिन किसी ने मेरी एक सुनी|मुझे अब तक नही समझ आया आखिर मुझे क्या झगड़े के रास्ते से गुजरने का ये सजा मिली है| या  जिस रास्ते में झगड़ा होता रहेगा| वो रास्ता इंसान को बदल कर जाना चाहिए| या मुसलमान होने के नाते इस तरह मुझे फर्जी फसाया गया|

अब कोर्ट ने हमें 6 महीने के लिए अपने जिले से दूर रहने का आदेश दिया। मैं इस जिले से उस जिले में ईंट-गारा का काम करके किसी तरह अपने बच्चों का पेट पाल रहा हूँ। रोज लगता है जैसे मेरी आत्मा वहीं थाने की दीवारों में कहीं कैद रह गई है। आज जब अपनी बात कह पाया हूँ| तो थोड़ा हल्का महसूस कर रहा हूँ।

बस अब उम्मीद है कि कभी तो इंसाफ मिलेगा। झूठे केसों की सच्चाई सामने आएगी और जो पुलिसवाले मुझे जानवर समझ बैठे थे| उन्हें भी कभी जवाब देना होगा।

 

                                                                                                                                    पीड़ित

                                                                               सोनू उर्फ़ रफावत                                                                           

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