Thursday, February 5, 2026

पुश्तैनी हक़ की लड़ाई, जख्मों और खून से लिखी कहानी जमीन के झगड़े से शुरू हुआ दर्द, पुलिस की यातना ने जिंदगी तबाह कर दी

 

मेरा नाम वैभव सिंह है। मेरी उम्र- 23 वर्ष है| मेरे पिता का नाम आशुतोष सिंह है। मैं ग्राम हिरामनपुर, तहसील पिण्डरा, थाना सिंधोरा, जिला वाराणसी का रहने वाला हूँ। इस समय मैं एलएलबी प्रथम वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर का छात्र हूँ|

सुबह लगभग 7:30 बजे का समय था। हमारे घर में वह तूफान आया जिसने मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। मेरे दादा जी, राजेश कुमार सिंह, और मेरे पिता जी के बीच पुश्तैनी जमीन को लेकर कहासुनी शुरू हुई। बात इतनी बिगड़ी कि दादा जी ने गुस्से में कहा जमीन छोड़कर यहाँ से चले जाओ। उन्होंने तुरंत जिला पंचायत सदस्य, परिवार के कुछ लोग और 112 नंबर पुलिस को बुला लिया। तीन पुलिसकर्मी घर आए, मगर दादा जी किसी की बात मानने को तैयार नहीं हुए। पुलिस लौट गई।

इसके बाद हालात और बिगड़ गए। दादा जी ने माँ और पापा से मारपीट की, गालियाँ दीं। बीच-बचाव में आए जिला पंचायत सदस्य अनिल सिंह का पैर फिसल गया और उनका पैर टूट गया। पापा उन्हें अस्पताल ले गए। जाते समय उन्होंने मुझे 42,000 रुपये जमा करने के लिए दिए। मुझे नहीं पता था कि यह रुपये तो मैं जमा कर दूँगा, लेकिन इसके बाद मेरे जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा शुरू होने वाली है।

करीब तीन बजे मैं, माँ, बहन और डेढ़ साल की भांजी भूमि सिंह घर पर टीवी देख रहे थे। तभी अचानक तीन लोग अरविंद यादव, हरपुल सिंह और सिपाही राकेश सरोजबिना इजाज़त घर में घुस आए।उन्होंने मेरा पैर पकड़कर मुझे घसीटना शुरू कर दिया और बेरहमी से पीटने लगे। मेरी माँ ने रोकने की कोशिश की तो उनका ब्लाउज फाड़ दिया गया। मेरी बहन के साथ बदसलूकी की गई और माँ को इतनी गंदी गालियाँ दीं जिन्हें सुनकर भी रूह कांप जाती है।फिर मुझे ज़बरदस्ती गाड़ी में बिठा दिया गया और कहा थाने चल, तेरी हेकड़ी निकाल देंगे।

थाने ले जाने के बजाय मुझे सुनसान नहर किनारे ले जाया गया। वहाँ लाठी, डंडों और जूतों से मुझे जानवर की तरह पीटा गया। मेरी गर्दन, सीना और पेट पर बूट रखकर दबाया गया। वे चिल्ला रहे थे| आज तुझे पुलिस का असली रोल दिखाते हैं। मैं दर्द से तड़पता रहा और बेहोश हो गया।उसी समय मेरे पापा, जो अनिल सिंह को अस्पताल में भर्ती कराकर लौट रहे थे, यह सब देख पहुंचे। उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा मेरे बेटे का कसूर क्या है?
लेकिन पुलिसवालों ने उन्हें भी धक्का दिया और कहा थाने चलो। थाने पहुँचने पर मुझे थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया। पेट में डंडे से ऐसे मरोड़ा गया कि मुँह से खून निकल आया। गमलों से मारा गया। कई बार मैं बेहोश हो गया। पापा को मुझसे मिलने तक नहीं दिया गया।

बेहोशी की हालत में मुझे दीनदयाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जब पूछा कि इतनी चोट कैसे लगी, तो पुलिस ने झूठ बोला बाइक से एक्सीडेंट हुआ है। 30 मिनट बाद डॉक्टर ने मुझे BHU ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन मेरे पापा मुझे सीधे वाराणसी कमिश्नर अशोक मुथ्था जैन के पास ले गए। पापा की गुहार सुनकर कमिश्नर साहब ने तुरंत दोषी दरोगा अरविंद यादव को निलंबित कर दिया और पुलिस सुरक्षा में मुझे ट्रॉमा सेंटर भेजा।

BHU में एक दिन इलाज चला, फिर मुझे नोआ अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए। अब तक इलाज में पाँच लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस घटना के चलते मेरा बीए तृतीय वर्ष का पेपर (13 जून 2023) भी छूट गया।आज भी मामला कोर्ट में चल रहा है। वहीं बुआ के बेटों की ओर से धमकी मिल रही है, केस उठा लो।

मैं चाहता हूँ कि मेरे पिता जी को पुश्तैनी जमीन में उनका हक़ मिले।दादा जी, बुआ, फूफा और पुलिस की मिलीभगत की सच्चाई सामने आए।जिन्होंने मुझे और मेरे परिवार को प्रताड़ित किया है, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले।


मुकदमा कोर्ट से उठा लो, नहीं तो पूरे परिवार को जान से मारकर गायब कर देंगे।

 

मेरा नाम आशुतोष कुमार सिंह उम्र: 50 वर्ष, है| मेरे पिता का नाम  राजेश कुमार सिंह है|मै ग्राम -हिरामनपुर, तहसील- पिंडरा, थाना- सिंधोरा, जिला-वाराणसी  का निवासी हूँ| मेरे परिवार  में 2 बेटियाँ, 1 बेटा, है| मै व्यवसाय आर.. प्लांट तथा ऑटो पार्ट्स की दुकान है|इसी से परिवार का भरणपोषण करता हूँ|

घटना दिनांक 17/06/2023 (सुबह लगभग 8 बजे)मेरे पिता श्री राजेश कुमार सिंह ने अपने हिस्से की जमीन मुझे दी थी। उसी जमीन पर मेरा मकान बना हुआ है। इसी जमीन को लेकर विवाद बढ़ गया और मेरे पिता ने 112 नंबर पर पुलिस बुला ली। पुलिस आई, समझाकर चली गई।उसी समय मैं अनिल सिंह को लेकर लक्ष्मी हॉस्पिटल, वाराणसी भर्ती कराकर घर वापस लौट रहा था। रास्ते में जब मैं चारो गाँव के पास पहुँचा तो देखा कि मेरा बेटा वैभव को दबंग पुलिसकर्मी रोड पर गिराकर बुरी तरह मार रहे थे मैं घबराकर गाड़ी से उतरा और बेटे को बचाने लगा।मैंने पूछासाहब, क्यों मार रहे हैं?”इस पर दरोगा अरविंद कुमार यादव, चौकी इंचार्ज हरपुल सिंह तथा सिपाही राकेश सरोज ने धमकी दी कि जान से मार देंगे।मेरे बेटे वैभव के मुँह और सिर से खून निकल रहा था| उसे जूते से दबाकर मारा जा रहा था और बाद में मोटर साइकिल पर बैठाकर थाने ले गए।जब मैं घर पहुँचा तो मेरी पत्नी और बेटी रो रही थीं। उन्होंने बताया कि पुलिस वाले घर में घुस आए और वैभव और प्रियंका को बुरी तरह मारा मेरी पत्नी को   भी पीटा  कपड़ा फाड़ दिया|

मेरे बेटे वैभव का सोने की चेन, Vivo मोबाइल (मूल्य 42,000) और हजारों रुपये नकद जबरन छीन लिए। चैन खींचते समय वैभव के गले में खरोंच भी आई।पुलिस अधिकारियों को सूचना गाँव के लोगों के साथ थाना गए। थाना प्रभारी आशीष मिश्रा ने बताया कि आरोपी पुलिसकर्मी अरविंद यादव (चौकी इंचार्ज)हरपुल सिंह (एस.आई.) राकेश सरोज (सिपाही) वैभव को दीनदयाल हॉस्पिटल लेकर गए हैं।इसके बाद हम पुलिस कमिश्नर के आवास गए। वहाँ हमारे बेटे की हालत देखकर DGP, DIG और ACP को तुरंत सूचना दी गई। DGP ने हमारे बेटे को ट्रॉमा सेंटर भेजकर इलाज करवाया।इलाज एवं खर्चट्रॉमा सेंटर में MRI, CT Scan सहित कई जाँचें की गईं।इलाज पर लगभग 1,00,000 का व्यय हुआ।FIR दर्ज होने की समस्या घटना के अगले दिन (18/06/2023) मैंने थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र दिया| लेकिन आरोपी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज नहीं की गई मैंने इसके बाद18/06/2023 को अपर पुलिस आयुक्त को आवेदन दिया,30/06/2023 को पुलिस कमिश्नर को प्रार्थना पत्र दिया| पुलिस कमिश्नर ने कहा कि FIR दर्ज करानी है तो कोर्ट जाइए, और बताया कि चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है।घटना के सदमे से घर में एक सप्ताह तक खाना नहीं बना। पत्नी और बेटियों की हालत खराब हो गई।मुकदमा दायर और गवाहों के बयानइसके बाद मैंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी की अदालत में मुकदमा दायर किया।सभी गवाहों के बयान भी हुए।हालाँकि न्यायालय द्वारा सुलह कर लो, दस लाख दिलवा देंगे कहा गया, पर मैंने स्पष्ट कहा साहब, हमें केवल न्याय चाहिए, सुलह नहीं।फिर से जान का खतरा (धमकी)अब भी मेरे बेटे वैभव को कॉलेज जाते समय दबंग लोग धमकी देते हैं किसन कुमार उर्फ राज पुत्र कल्लू सिंह, ग्राम सरौनी, थाना जंसा, वाराणसी शिवम कुमार पुत्र कमलेश सिंह, ग्राम भिखमपुर, थाना कपसेठी इन लोगों ने कहा कि:मुकदमा कोर्ट से उठा लो, नहीं तो पूरे परिवार को जान से मारकर गायब कर देंगे। कोई कुछ नहीं कर पाएगा। हमारा पूरा परिवार सदमे और भय में है।
इसकी लिखित सूचना मैंने पुलिस कमिश्नर और DIG को दे दी है।अब मामला कोर्ट में चल रहा है और हमें न्याय की आशा है।

 

 

 


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