मेरा नाम अभिनेश प्रताप सिंह है| मेरी उम्र 26 वर्ष है| मेरे पिता का नाम स्व० महेंद्र प्रताप सिंह है| मैने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा ली है| मै अविवाहित हूँ| मै दैनिक समाचार पत्र जागरूक एक्सप्रेस का ड्रामनगंज का क्षेत्रीय सवांददाता हूँ| मै करीब 5 वर्षी से पत्रकारिता से जुड़कर निष्पक्ष कार्य कर रहा हूँ| मै ग्राम करनपुर,थाना-ड्रमंगंज,जिला-मिर्जापुर का मूल निवासी हूँ|
11 जून,2023
की तारीख थी| तकरीबन साढ़े इग्यारह बजे ब्यूरोचीफ संतोष देव गिरी जी का फोन आया| मैंने फोन उठाया तो उन्होंने बोला सुचना मिली है की भोर में कोयला लादकर ट्रक बिहार जा रही थी| जिसका एक्सीडेंट ड्रमंनगंज घाटी पर हुआ है| ट्रक ड्राइवर और खलासी की मौत हो गयी है| जाकर न्यूज कवरेज कर लो| मै तुरंत अपनी बाइक से घटना स्थल ड्रमंनगंज घाटी पहुचा| तो थाना ड्रमंनगंज की काले रंग की बोलेरो गाडी वहा खड़ी थी| एक SI
साहब और तीन सिपाही मौके पर मौजूद थे|
मैने न्यूज कवरेज करने के लिए जैसे अपने जेब से मोबाईल निकाला| तभी उन पुलिस वालो ने मुझे बुलाया| मै उनके पास गया बोला साहब क्या बात है| वह लोग बिना कुछ कहे मेरे गाड़ी की चाभी और मेरा मोबाईल फोन मुझसे छीन लिया| मै कुछ समझ पाता तभी उन लोगो ने बोला चलो थाने तुमसे पूछताछ करना है|
मैंने कहा साहब आप चलिए मै अपनी बाइक से आ रहा हूँ|लेकिन उन लोगो ने मेरी एक न सुनी मुझे डाटते हुए बोला कि मै दो पहिया लेकर आ रहा हूँ तुम गाडी में बैठो मै पुलिस कि गाडी में बैठ नही रहा था|तब पुलिस वाले ने जबरन मेरा हाँथ पकड़ गाडी में बैठा लिया| गाड़ी में दो लोग पहले से मौजूद थे| रास्ते भर पुलिस अपशब्द भाषा का इस्तेमाल कर मुझे मानसिक तौर पर परेशान कर रही थी |
थोड़ी देर बाद गाड़ी थाने पर जाकर रुकी | मुझे गाडी से उतरवाकर थानाध्यक्ष के सामने यह कहकर पेश किया गया की मै चोरो का सरगना चलाता हूँ| पुलिस की बात सुनकर मै अवाक् रह गया| मै कुछ कह पाता तभी थानाध्यक्ष साहब बोले कि इसे उधर लेकर जाकर लाकअप में डाल दो|
मौजूद पुलिस वाले मुझे लाकअप में ले गये| लाकअप में पहले से लोग बंद थे| उस वक्त अजीब सी घबराहट हो रही थी| पुलिस का व्यवहार मेरे साथ अपराधियों की तरह था| लाकअप में तीन पुलिस वालो ने पीछे से मेरा हाँथ पकड़ लिया| उसके बाद एक पुलिस वाला मुझे लाठी डंडा से मारने लगे| मारते वक्त वह यही बोल रहे थे की अपने मिडिया का नाम बताओ|
मैंने उन्हें बताया तो वह मुझ पर जितनी लाठिया बरसाते तो यही बात कहते की तुम्हारी सारी मिडियागिरी निकाल देंगे| यह सब सुनकर बहुत तकलीफ हो रही थी| हमने क्या गलत किया है जो हमारे साथ अपराधियों की तरह व्यवहार कर रहे है|
उस वक्त पुलिस हमे शारीरिक और मानसिक दोनों यातनाये दे रही थी| वह लोग मेरे शरीर पर बेरहमो की तरह लाठिया बरसा रहे थे| लग रहा था कमर टूट जाएगी| तकरीबन पन्द्रह मिनट तक वह हमे मारते रहे| मै चीख-चीख कर बार-बार दुहाई दे रहा था कि मै अपराधी नहीं हूँ। हम सिर्फ खबरें लिखते हैं|लेकिन उन लोगो को इस बात का कोई असर नही हुआ|
तकरीबन चार बजे IPC
की धारा 151 में चालान कर दिया गया| वहा से मुझे हलिया अस्पताल ले जाया गया| जहा मेडिकल मुआवना हुआ| उसके बाद लालगंज तहसील ले गये|
उस वक्त मेरे पास एक पैसा नही था| अपने जानने वाले को फोन कर पन्द्रह सौ रुपया लिया| जिससे सात सौ रुपया ऑटो का किराया और छ: सौ रुपया जमानत के लिए दिया| उस वक्त बस यही लग रहा था की आज बेवजह पुलिस वालो की वजह से यह दिन देखना पढ़ रहा है|
वहा से जमानत कराने के बाद थाने गया| थानाध्यक्ष जी को फोन किया की साहब हमारी मोटरसाईकिल की चाभी दे दीजिये| इस पर उन्होंने बोला रुको किसी सिपाही को फोन करते है| मै पाच मिनट तक इन्तेजार करता रहा| लेकिन किसी ने चाभी नही दी दुबारा जब हमने थानाध्यक्ष को फोन किया तो उन्होंने बोला की थाने में जाकर किसी सिपाही से बात कराओ| मै अंदर गया तो ओमप्रकाश सिपाही थे मैंने उनसे बात कराया तो मुझे गाड़ी की चाभी मिली|
वहा से मै गाड़ी लेकर घर आया| उस वक्त तकरीबन साढ़े आठ नौ बजे थे| मैंने घर में किसी से कुछ नही कहा माँ सुनती तो उसे बहुत तकलीफ होती| उसने बड़े लाड प्यार से मुझे पाला है| मै जब माँ के गर्भ में था तभी पिता का देहांत हो गया|उसने कभी भी मुझे किसी चीज की कमी महसूस नही होने दी | इतना बड़ा दर्द वह कैसे सह पायेगी| उस वक्त अजीब सी उलझन थी| मै चुपचाप कमरे में चला गया|
खाना पीना कुछ भी अच्छा नही लग रहा था| उस रात मै सो नही सो पाया मैंने कभी सपने में नही सोचा था की मुझे यह दिन देखना पड़ेगा| रात भर करवट बदलता रहा|
दुसरे दिन एसएसपी साहब के यहा प्रार्थना पत्र लेकर गये| लेकिन एसएसपी साहब उठ गये थे| एसएसपी साहब और पुलिस महानिरीक्षक महोदय को रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजा| उसके बाद ब्यूरो चीफ के पास जाकर आप बीती बताकर चोट दिखाया| जिसका वीडियो बनाकर उन्होंने वायरल कर दिया| जिसके बाद यह बात मेरी माँ को पता चली| वह दहाडे मारकर रोने लगी|माँ को इस बात का अफ़सोस था की बेवजह पुलिस वालो ने हमे यातनाये दी| मेरे शरीर पर लगे पुलिस के डंडे के जख्मों को देखकर वह बिलख रही थी|
मेरे साथ पुलिसिया जुल्म-ज्यादती की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पता चला की दो पुलिस वालो को लाईन हाजिर कर दिया गया हैं। लेकिन अभी तक किसी पुलिस अधिकारी ने मेरा बयान नही लिया है| मुझे इस बात की तकलीफ है की पुलिस वाले जो कानून के रखवाले है| वही कानून का नियम तोड़ रहे है| बेवजह मुझे गिरफ्तार किया| मुझे शारीरिक और मानसिक यातना दी| मेरे घर वालो को भी मेरी गिरफ्तारी की सुचना नही दी गयी| जब मै पुलिस हिरासत में था|मेरे फोन पर किसी जानने वाले का फोन आया तो पुलिस ने गलत सुचना देते हुए कहा मै बाजार सब्जी लेने गया हूँ|
इस घटना के बाद से मन में एक डर सा हो गया है| पुलिस जिसे चाहती है बेवजह पकड़ कर हवालात में ठूंसकर पिटाई करने लग जाती है।"जब हम जैसे लोगो के साथ वह अमानवीय व्यवहार कर सकती है|तो किसी और के साथ वह कितना गलत कर सकती है| दिलो दिमाग में यही बात हर वक्त गुजती रहती है| मुझे न्याय कब मिलेगा|यह सवाल दिन रात मेरे दिमाग में चल रहा है|
मै बस यही चाहता हूँ की जिन पुलिस वालो लोगो ने मेरे साथ गलत किया है| उन पर आवश्यक कार्यवाही की जाय| जिससे भविष्य में किसी बेगुनाह के साथ ऐसा व्यवहार न हो|
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